राहें गुज़र, खा़मोश वो
अनदेखा सा, थक हार कर
सहसा कहीं, हंसता कभी
हर आह का, आभार कर
मंजिल बिना, चलता महज़
एक नाम में, ले सांस भर
पाया कभी, खाेया नहीं
खाेया तो, ना एहसास कर
उसमें ही है, उसकी लगन
कि, सपना कोई सोता नहीं
हर हाथ, ‘उसका’ साथ है
पर, अपना कोई होता नहीं ।
Heart touching as always!!
Heart ❤ touching. 👍🏻
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किस से किस का गिला करे
अपना कोई होता नहीं ।
रात आ कर गुज़र भी जाती है
अपना कोई होता नहीं ।
बस आरज़ू हसरत और उम्मीद
अपना कोई होता नहीं ।
🌻