
प्रेम से बोलो तो, बोलो वह मानें
दूजे की बगिया को सींचो तो जानें
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अपनी किलकारी में राजा और रानी
दूजे के सागर में कितना कम पानी?
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सबको बराबर से चाहो तो मानें
दूजे की बगिया को सींचो तो जानें,

स्वयं की बातों में फूल और हीरे
दुनिया की नाव लगाए हो तीरे
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पीड़ा हो तेरी और कारण बेगाने
दूजे की बगिया को सींचो तो जानें
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रातों में तेरी तू रोया तो होगा
एक नाम ने मन भिगोया तो होगा,
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फटकार मां की सुनी भी तो होगी
गलती पर धरती को छुआ भी तो होगा
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फिर काहे ना खुशबू फैलानी है तुझको
है मौका, हिम्मत कर, हरा दे तू मुझको
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दुआएं ले सबकी बन योगी तो मानें
दूजे की बगिया को सींचो तो जानें
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प्रेम से बोलो तो, बोलो वह मानें
दूजे की बगिया को सींचो तो जानें ।
