उनकी पलकों पे सजे
महकते ख्वाबों का
बनना हिस्सा है अभी
कोई आवाज़ ना दे।

चहकते हंसते उन
गूंजते लफ्ज़ों का
पिरो लूं गीत अभी
कोई आवाज़ ना दे।
कदम वो छू ले, जिन
हसीन फूलों का
बना लूं इत्र अभी
कोई आवाज़ ना दे

हवा से लहरों तक
अनकहे लम्हों की
निभालूं रस्म अभी
कोई आवाज़ ना दे।
आवाज़ ना दे।