दिनोंदिन प्यार मेरा खिलता जाए मेरे सनमहुई रंगीन परछांई, झूमे सारे मौसम
नशा कैसा छाए हर पल, नींद आए कम कम
उन सांसो की धुन पर जी रहे हैं तेरी कसम,

गर मेरी याद रुला दे तो माफी है हमें ?
इस जहां भर से ज्यादा प्यार यह काफी है तुम्हें?
कहीं चिलमन से देख लेंगे वहीं छिपने दो
मेरे महबूब की बरकत, उम्मीदें लिखने दो,

उनके दीदार से इन वादियों में है गुलशन
ये है आलम कि एक हो गए हैं मन, जीवन
करो आवाज कभी जां करीब पाओगे
पुकारो कुछ भी अब मीरा, राधा या जोगन ।।

राधा ने श्री कृष्णा से पूछा,
प्यार का असली मतलब क्या होता है,
श्री कृष्णा ने हँस कर कहा,
जहाँ मतलब होता है वहां प्यार ही कहाँ होता है।
हो काल-गति से परे चिरंतन अभी वहाँ थे, अभी यहाँ हो,
कभी धरा पर, कभी गगन में, कभी कहाँ थे, कभी कहाँ हो,
तुम्हारी राधा को भान हैं तुम सकल चराचर में हो समायें,
बस एक मेरा हैं भाग्य मोहन कि जिसमें हो कर भी तुम नही हो।
राधा की आँखें तरसी होंगी,
जब कान्हा मथुरा गये होंगे,
दिल भी बहुत रोया होगा,
जब वो रूक्मिणि के भये होंगे।